सोलन (नरेंद्र कुमार, संवाददाता),
सोलन के चंबाघाट श्मशान घाट में अस्थियों के न मिलने को लेकर सामने आए मामले में पुलिस जांच के बाद वस्तु स्थिति स्पष्ट हो गई है। पुलिस चौकी शहर सोलन द्वारा शिकायतपत्र संख्या 275/BH दिनांक 25 दिसंबर 2025 की तसदीक करते हुए यह पाया गया कि यह घटना किसी चोरी या दुर्भावनापूर्ण मंशा का परिणाम नहीं, बल्कि एक मानवीय भूल के कारण घटित हुई।
पुलिस द्वारा की गई तसदीक के दौरान चंबाघाट श्मशान घाट में दाह संस्कार से संबंधित रजिस्टरों का अवलोकन किया गया तथा मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को गहनता से खंगाला गया। इस प्रक्रिया में शिकायतकर्ता के भाई श्री राजीव पाल को भी मौके पर बुलाकर शामिल किया गया, वहीं दूसरे पक्ष श्री प्रणव घोष पुत्र श्री पी.के. घोष के बयान भी कलमबद्ध किए गए।
जांच में सामने आया कि श्री प्रणव घोष के चाचाजी स्वर्गीय विजय घोष का अंतिम संस्कार भी इसी श्मशान घाट में हुआ था। उनकी अस्थियाँ श्मशान घाट में बने एक लोकर में ताला लगाकर रखी गई थीं। लोकर एक जैसे होने, चाबियों के मिल जाने और प्रातःकाल अंधेरा होने के कारण दिनांक 19 दिसंबर 2025 को श्री प्रणव घोष भूलवश शिकायतकर्ता की माता की अस्थियाँ अपने चाचाजी की अस्थियाँ समझकर हरिद्वार ले गए। बाद में उन अस्थियों को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित कर दिया गया, जबकि उनके चाचाजी की अस्थियाँ श्मशान घाट में ही दूसरे लोकर में सुरक्षित पाई गईं।
तसदीक के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि यह घटना पूरी तरह से अनजाने में हुई है। श्री प्रणव घोष व उनके परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी, जिसे शिकायतकर्ता पक्ष ने स्वीकार कर लिया। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि वे इस मामले में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते।
पुलिस ने समग्र जांच, सरसरी पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि इस प्रकरण में कोई संज्ञेय अपराध नहीं हुआ है और यह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण मानवीय त्रुटि का परिणाम है।

