सिरमौर के निजी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति के लिए 5.24 लाख रुपये की धनराशि जारी

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नाहन (संध्या कश्यप,संवाददाता),


जिला सिरमौर में आर्थिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 के तहत निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि जारी कर दी गई है। उप निदेशक, स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक) राजीव ठाकुर ने बताया कि विभाग की लगातार कोशिशों से अब अधिक संख्या में गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिल पा रहा है।शैक्षणिक सत्र 2025–26 की पहली छमाही के लिए विभाग ने 5,24,190 रुपये की राशि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को भेजी है। इससे 21 स्कूलों के कुल 68 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2023–24 में पहली बार 6 स्कूलों के 11 विद्यार्थियों के लिए 1,91,100 रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद 2024–25 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 स्कूलों के 39 विद्यार्थियों हेतु 5,83,296 रुपये तक पहुंच गया। अब 2025–26 में लाभार्थियों की संख्या और भी बढ़ गई है। उप निदेशक ने कहा कि वर्ष की दूसरी किस्त के लिए भी लगभग इतनी ही धनराशि विभाग को भेजने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। उन्होंने सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि हर सत्र से पहले 25% आरक्षित सीटों के संबंध में व्यापक प्रचार करें और इस प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख अपने प्रॉस्पेक्टस में भी करें।विभाग ने उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन को भी अनिवार्य बताया है। इसके अलावा, योजना की निगरानी के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर दिसंबर 2023 तथा नवंबर 2025 में समितियां गठित की जा चुकी हैं। उन्होंने निजी स्कूलों से आग्रह किया कि वे सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए गरीब परिवारों के बच्चों को प्रवेश देने में सहयोग करें। यदि किसी स्कूल द्वारा आरटीई के नियमों की अवहेलना की गई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उप निदेशक ने आम जनता से भी अपील की कि वे योग्य परिवारों को इस योजना के बारे में जागरूक करें। प्रवेश के लिए नियमों के अनुसार बीपीएल प्रमाण पत्र अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिए संबंधित स्कूल, खंड शिक्षा अधिकारी या उप निदेशक (प्रारंभिक) कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।जिला सिरमौर में आर्थिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 के तहत निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि जारी कर दी गई है। उप निदेशक, स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक) राजीव ठाकुर ने बताया कि विभाग की लगातार कोशिशों से अब अधिक संख्या में गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिल पा रहा है।शैक्षणिक सत्र 2025–26 की पहली छमाही के लिए विभाग ने 5,24,190 रुपये की राशि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को भेजी है। इससे 21 स्कूलों के कुल 68 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2023–24 में पहली बार 6 स्कूलों के 11 विद्यार्थियों के लिए 1,91,100 रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद 2024–25 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 स्कूलों के 39 विद्यार्थियों हेतु 5,83,296 रुपये तक पहुंच गया। अब 2025–26 में लाभार्थियों की संख्या और भी बढ़ गई है। उप निदेशक ने कहा कि वर्ष की दूसरी किस्त के लिए भी लगभग इतनी ही धनराशि विभाग को भेजने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। उन्होंने सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि हर सत्र से पहले 25% आरक्षित सीटों के संबंध में व्यापक प्रचार करें और इस प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख अपने प्रॉस्पेक्टस में भी करें।विभाग ने उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन को भी अनिवार्य बताया है। इसके अलावा, योजना की निगरानी के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर दिसंबर 2023 तथा नवंबर 2025 में समितियां गठित की जा चुकी हैं। उन्होंने निजी स्कूलों से आग्रह किया कि वे सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए गरीब परिवारों के बच्चों को प्रवेश देने में सहयोग करें। यदि किसी स्कूल द्वारा आरटीई के नियमों की अवहेलना की गई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उप निदेशक ने आम जनता से भी अपील की कि वे योग्य परिवारों को इस योजना के बारे में जागरूक करें। प्रवेश के लिए नियमों के अनुसार बीपीएल प्रमाण पत्र अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिए संबंधित स्कूल, खंड शिक्षा अधिकारी या उप निदेशक (प्रारंभिक) कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

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