कुल्लू (आशा डोगरा, सब एडिटर),
बंजार विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री सुरेंद्र शौरी ने प्रदेश सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विधानसभा के चल रहे शीतकालीन सत्र में जब उन्होंने क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर प्रश्न पूछा, तो सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक उत्तर ने स्वयं शिक्षा व्यवस्था की भयावह तस्वीर उजागर कर दी। सरकार ने अपने ही जवाब में स्वीकार किया है कि बंजार क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के अनेक महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं और आज तक इन्हें भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्राप्त उत्तर के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में जी.बी.टी. के 47, टी.जी.टी. आर्ट तथा टी.जी.टी. नॉन-मेडिकल के कुल 46 पद खाली हैं, जिनमें कई विद्यालय तो ऐसे हैं जहाँ एक भी नियमित जेबीटी या टी.जी.टी. अध्यापक तैनात नहीं है। इससे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यही स्थिति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में भी बनी हुई है, जहाँ प्रवक्ता श्रेणी के कुल 53 पद रिक्त हैं—इनमें अंग्रेज़ी, हिन्दी, गणित, इतिहास, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे मुख्य विषय शामिल हैं। सरकार के जवाब में यह भी सामने आया कि कई पद तो वर्षों से रिक्त पड़े हैं, लेकिन विभाग ने पदों को भरने के लिए कोई भी प्राथमिकता तय नहीं की है।
विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि शीतकालीन सत्र में दिए गए सरकारी उत्तर ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश सरकार शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकता के प्रति कितनी उदासीन है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया बंजार की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर कुठाराघात है। स्कूल बिना शिक्षकों के चल रहे हैं, बच्चे वर्ष दर वर्ष बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के आगे बढ़ने को मजबूर हैं, और सरकार कागज़ी आंकड़ों और खोखले दावों तक सीमित होकर बैठी है।
उन्होंने सरकार से तत्काल सभी रिक्त पदों को भरने, आवश्यकता अनुसार पुनर्संरचना और शिक्षकों की आपातकालीन तैनाती सुनिश्चित करने की मांग की तथा स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस मुद्दे पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाती, तो वे क्षेत्र के बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए हर मंच पर लड़ाई जारी रखेंगे।

