कुल्लू (आशा डोगरा, सब एडिटर),
बंजार विधानसभा क्षेत्र से संबंधित बागवानी उपकरणों के वितरण और सब्सिडी मामलों पर बंजार विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुरेंद्र शौरी के सवाल पर सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए उत्तर ने विभाग की सुस्ती और सरकार की उदासीनता को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि सहभागिता (सब्सिडी) के कुल 1041 मामले आज भी लंबित हैं। यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि बंजार के मेहनतकश बागवानों के साथ खुला अन्याय है। इतनी बड़ी देनदारी बेहद चिंतनीय है।
वर्ष 2025–26 के लिए बंजार में सरकार मात्र 19.51 लाख रुपये ही खर्च कर सकी, और सिर्फ 64 बागवानों को लाभ पहुँचा।
जबकि लंबित लाभार्थियों की संख्या 1041 है—यह स्थिति किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए शर्मनाक मानी जानी चाहिए।
विधायक सुरेन्द्र शौरी ने सरकार की इस कार्यशैली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:
“बंजार के बागवान अपनी मेहनत से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं, लेकिन सरकार उन्हें उनके हक से वंचित कर रही है। 1041 लंबित मामलों का मतलब है कि विभाग वर्षों से केवल फाइलें ढो रहा है—काम कुछ नहीं हो रहा। यह बंजार के बागवानों के साथ खुली उपेक्षा है।” कांग्रेस सरकार ने अपनी दस गारंटियों में से एक में बागवानों के हितों की रक्षा की बात कही थी पर आज बंजार में बागवानों की प्रत्यक्ष अपेक्षा हो रही है।
विधायक ने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए कहा है कि बागवानों की सब्सिडी फाइलें महीनों और वर्षों तक क्यों अटकने की समीक्षा की जानी चाहिए। लंबित 1041 मामलों को निपटाने की सरकार के पास क्या ठोस योजना है? विधायक शौरी ने कहा है कि इतने लंबित मामले देख केआर प्रतीत हो रहा है कि सरकार इन कल्याणकारी योजनाओं को बंद करनी की फिराक में है।
विधायक शौरी ने चेतावनी दी:
“यदि लंबित मामलों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो मैं इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाऊँगा। बंजार के बागवानों के साथ और देर तक अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
बंजार की जनता सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं—अब उन्हें परिणाम चाहिए, आश्वासन नहीं।


