बंजार (आशा डोगरा, कुल्लू),
जहाँ एक ओर प्रदेश की जनता अभी तक भीषण आपदा की मार झेल रही है, सैकड़ों परिवार बेघर हैं, सड़कें और खेत तबाह पड़े हैं — वहीं कांग्रेस पार्टी को जनता की नहीं, सत्ता की चिंता सताने लगी है।
“वोट चोर गद्दी छोड़” जैसे नारे लगाकर कांग्रेस ने यह साफ़ कर दिया है कि उसे न जनता के दर्द से कोई लेना-देना है, न राहत और पुनर्वास कार्यों से — उसका एकमात्र एजेंडा सस्ती राजनीति और नौटंकी करना रह गया है।
बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब प्रशासन और आम लोग मलबा हटाने में जुटे हैं, कांग्रेस के नेता पोस्टर चिपकाने और झंडे लहराने में व्यस्त हैं।
आधारहीन मुद्दों को हवा देना व अपनी तथा जनता का ऊर्जा व्यर्थ करना ही कांग्रेस सरकार की वास्तविक नीति है।
“कांग्रेस को शायद लगा है कि राहत सामग्री से ज़्यादा असरदार राहत जनता का ध्यान भटकाना रहेगा, उन्हें समझना चाहिए कि जनता अब पोस्टरों से नहीं, मदद से राहत चाहती है।”
शौरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आज उस मोड़ पर पहुँच चुकी है जहाँ न उसके पास संवेदना बची है, न ज़मीन।
“जनता की पुकार के बीच ‘गद्दी छोड़’ का राग अलापना बताता है कि कांग्रेस नेताओं की संवेदनाएँ अब सिर्फ माइक और मंच तक सीमित रह गई हैं।”
उन्होंने कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता दिन-रात राहत कार्यों में लगे हैं, जबकि कांग्रेस को आपदा में भी अवसर नज़र आता है।
“कांग्रेस के पास अब न नीति बची है, न नीयत — बस नारा ही शेष है, और वह भी जनता के ग़ुस्से में खो जाएगा।”
