कुल्लू,(आशा डोगरा/ सब एडिटर)
हिमाचल प्रदेश के सीपीएड शारीरिक शिक्षक संघ के 5349 बेरोज़गार पिछले 15 सालों से अपने इंसाफ की लड़ाई सरकार व कोर्ट के माध्यम से अपनी मांगों को लेकर लड़ रहे।लेकिन अभी तक इनकी समस्या का समाधान कोई भी सरकार नहीं कर पाई है ।सीपीएड शारीरिक शिक्षा संघ के सदस्य ब्रीज मार्कण्डेय का कहना है कि उनकी आधी उम्र अपनी माँगों को मनवाने बीत में गई लेकिन किसी सरकार के कानों तक जूँ नहीं रेंगी।और अब सीपीएड शारीरिक शिक्षक संघ की आख़िरी उम्मीदें हिमाचल प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू पर टिकी है।उन्होंने कहा कि जब हिमाचल प्रदेश के प्रशिक्षण संस्थानो से प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षकों को नौकरियां नहीं,तो बहरी राज्यों से प्रशिक्षण लेकर आए को भी नौकरियां क्यों ? C.P.ED शारीरिक शिक्षकों को ऐसी सजा क्यों? अपने ही प्रदेश की सरकार द्वारा खोले गए प्रशिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण लेने वाले को नौकरी नही और बहरी राज्यों से आए प्रशिक्षण वालों को सरकार बैच व कमिशन के लिए लेजिबल है, पर हम नहीं, ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों? ब्रीज ने कहा कि हम सरकार को याद दिलाना चाहते हैं,हम वो शारीरिक शिक्षक है जब वर्ष 2004-2005 से हिमाचल प्रदेश में SCVT के तहत हिमाचल में 12 जिलों में कांग्रेस सरकार के द्वारा विभिन्न जगहों पर प्रशिक्षण स्थान खोले गए।जिसमें बहुत सारे वकेशनल कोर्से करवाए गए। जैसे कला अध्यापक और बी फार्मेसी इत्यादि। जिसमें शारीरिक शिक्षकों का भी कोर्स P.E.T करवाया गया ।जिसमें सरकार द्वारा 1 वर्ष का शारीरिक शिक्षक का प्रशिक्षण करवाया गया।क्योंकि यह कोर्स इसीलिए हमें हिमाचल प्रदेश के संस्थानों द्वारा करवाया गया।2004 से पहले हिमाचल प्रदेश में शारीरिक शिक्षक कोर्स हेतु कोई भी सरकारी संस्थान नहीं थे इसलिए हिमाचल सरकार ने वर्ष 2004 में फैसला लिया गया था की उसमें हिमाचल में बहुत सारे युवा का सपना टूट जाता था। क्योंकि कुछ एक गरीब वर्ग के माता-पिता अपने बच्चों को प्रशिक्षण के लिए अमरावती, महाराष्ट्र इत्यादि संस्थानों पर नहीं भेज सकते थे। इसीलिए उस समय हिमाचल के मुख्यमंत्री स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह ने यह फैसला लिया था ।ताकि सभी वर्गों के बच्चों को शारीरिक शिक्षक बनने के लिए बाहरी राज्यों में न जाना पड़े। ब्रीज मार्कण्डे ने बताया कि हमें शारीरिक शिक्षक तो बनाया गया लेकिन हमें अभी तक सरकार नौकरियां नहीं दे पाई। जबकि हमारे ही बैच के कुछ एक शारीरिक शिक्षकों को pet के तहत स्कूलों में सेवा देकर 15 से 17साल हो गए है। उन्हें नौकरी इसलिए मिली क्योंकि जो उसे स्कूल के प्रबंधक पी.टी.ए कमेटी में अध्यक्ष या प्रिंसिपल इत्यादि के अपने चाहते वह रिश्तेदार थे। उनकी भर्ती तो सरकार ने करवा दी लेकिन गरीब व बेरोजगार के बच्चों के साथ अन्याय हुआ है। हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि R&P rules गरीब व बेरोजगार शारीरिक शिक्षक युवाओं पर क्यों, जो हमारे साथ प्रशिक्षण लेकर सीधे नौकरी पर उन पर क्या R&P रूल लागू नहीं होते। तो नौकरी से वंचित करना चाहिए था। ऐसा अन्याय हम कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार से हम यह पूछना चाहते हैं। क्यों तो हमें प्रशिक्षण दिया गया क्यों हमारे साथ ऐसा अन्याय हुआ, जब प्रशिक्षण करवाने के लिए हमारे मां-बाप ने अपनी जमीन बेचकर या किसी से कर्ज मांग कर यह प्रशिक्षण हमारे से करवाया गया था। जिन मां-बाप ने हमें जमीन बेचकर व कर्ज निकाल कर हमारे से शारीरिक शिक्षक बनने का सपना देखा था।आज उन्ही मां-बाप के साथ सरकार ने धोखा किया है। उनके सपने टूटते नजर आ रहे हैं। उस कर्ज़ की पूर्ति हम आज भी नहीं कर पा रहे हैं। वर्ष 2015 से लेकर अभी तक हम विभिन्न सरकारों व न्याय के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन हमें झूठे वादे व आश्वास के सिवाय कुछ भी न्याय नहीं मिल पा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें मुख्यमंत्री पर भरोसा ही नहीं पूर्ण विश्वास है। कि वह हमारे दर्द को समझेंगे। हमें जल्द ही कमीशन व बैच वाइज भर्ती में बैठने का मौका देंगे। हमारे भविष्य को खतरे में न रखकर हमारी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।ब्रीज ने सरकार से मांग की हैं कि जो शुरू में फैसला लिया गया था कि एलिमेंट्री में आपकी भर्ती की जाएगी, जिसमें प्राइमरी स्कूलों से लेकर ऊपर के सभी स्कूलों में middle school , हाई स्कूल, और सेकेंडरी स्कूल व आईटीआई में शारीरिक शिक्षा का होना अनिवार्य था।सरकार ने जो वादा किया था की हर स्कूलों में शारीरिक शिक्षक का होना अनिवार्य है। शारीरिक शिक्षा होनी चाहिए, जो की प्राइमरी स्तर पर ही बच्चों को एक शारीरिक शिक्षक लगाया जाएगा। जिससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक ,बौद्धिक विकास तथा सर्वांगीण विकास होगा। जो की आज तक बच्चों को बिना शारीरिक शिक्षक के उनका एक अच्छा खिलाड़ी का सपना टूट गया है। उन्होंने बताया कि C.P.ED वालों के साथ जो भी एक धोखा हुआ है जबकि सरकार ने हमारे लिए प्राइमरी स्तर से लेकर हाई स्कूल तक भर्ती करवाने का वादा किया था। जो कि वह अभी तक पूरा नहीं कर पाई।

