ब्यूरो रिपोर्ट ( राजगढ़ ) डेढ़ वर्ष बाद आज गंगू राम मुसाफिर व उनके कार्यकर्ताओं की कांग्रेस पार्टी में वापसी हुई है, कांग्रेस पार्टी को विश्वास है की कार्यकर्त्ता के साथ पच्छाद क्षेत्र में आगामी चुनाव में एक बड़ी लीड मिल सकती है। देखा जाए तो मुश्किलों का सिलसिला अब शुरू होने वाला है, क्यूंकि पच्छाद में गंगूराम मुसाफिर और दयाल प्यारी का आपस में 36 का आंकड़ा है, किस तरह से दोनों गुट एक साथ एक मंच पर आकर कांग्रेस पार्टी का प्रचार प्रसार करेंगे, ये सवाल बना रहेगा। क्यास ये भी लगाए जा रहें की गंगू राम मुसाफिर की पार्टी में वापसी होने के बाद कहीं दयाल प्यारी व उनके कार्यकर्ताओं की अनदेखी तो नहीं होगी।गंगूराम मुसाफिर और दयाल प्यारी दोनों के लिए ये सफऱ एक संघर्ष की तरह होने वाला है। एक तरफ गंगू राम मुसाफिर कांग्रेस पार्टी के पुराने नेता रहे रहें और दूसरी तरफ दयाल प्यारी ने पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ कर अपनी पहचान बनाई है।अब ऐसे में किन शर्तों के साथ गंगू राम मुसाफिर ने कांग्रेस पार्टी में वापसी की है, ये अभी सवाल ही बना हुआ है । गंगूराम मुसाफिर की पार्टी में वापसी होने के बाद पच्छाद में कांग्रेस पार्टी कितनी मजबूत होगी, इसका पता आने वाले लोकसभा के चुनाव के नतीजो के बाद पता चलेगा।आपको बता दे पूर्व में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से टिकट न मिलने पर गंगूराम मुसाफिर ने आज़ाद चुनाव लड़ा और कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ रही दयाल प्यारी को कड़ी टककर दी पच्छाद में कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंट गई और इसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार रीना कश्यप को मिला और वह दूसरी बार चुनाव जीत गई।एक तरफ पच्छाद में जहाँ पार्टी कार्यकर्ताओं में वापिसी को लेकर ख़ुशी है तो वहीं मुसाफिर को ये अग्निपथ अपनी मजबूत रणनीति से पार करना होगा।

