ब्यूरो रिपोर्ट।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश में भी दिखने लगा है। निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली ईंट और सीमेंट की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे मकान, होटल और अन्य भवनों के निर्माण की लागत में इजाफा तय माना जा रहा है।प्रदेश में ईंटों के दाम में प्रति ईंट करीब 2 रुपये तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हिमाचल में ईंटों का स्थानीय उत्पादन सीमित होने के कारण राज्य पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाली सप्लाई पर निर्भर है। ऐसे में बाहरी राज्यों से आने वाली ईंटों के महंगे होने का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ रहा है।ईंट भट्ठों में इस्तेमाल होने वाले कोयले की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। पहले कोयले की कीमत 10 से 13 हजार रुपये प्रति टन के बीच थी, जो अब बढ़कर करीब 30 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। कोयले की यह बढ़ती कीमत ईंट निर्माण लागत को सीधे प्रभावित कर रही है।वहीं, नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सीमेंट के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार अप्रैल के पहले सप्ताह से सीमेंट कंपनियां प्रति बैग करीब 40 रुपये तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। वर्तमान में सामान्य सीमेंट 440 रुपये प्रति बैग के आसपास बिक रहा है, जो बढ़कर 480 रुपये तक पहुंच सकता है।अगर एक औसत मकान के निर्माण में लगभग 500 बैग सीमेंट की खपत होती है, तो इस बढ़ोतरी से कुल लागत में 20 से 25 हजार रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। एसीसी, अंबुजा और अल्ट्राटेक जैसी प्रमुख कंपनियों के सीमेंट दामों में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आई है, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर निर्माण सामग्री की कीमतों पर पड़ रहा है।
