ब्यूरो रिपोर्ट।
High Court of Himachal Pradesh ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने पद से इस्तीफा देता है तो उसकी पिछली पूरी सेवा जब्त मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में कर्मचारी या उसकी मृत्यु के बाद उसका परिवार फैमिली पेंशन अथवा अन्य सेवा लाभों का दावा नहीं कर सकता।यह फैसला न्यायाधीश Jiya Lal Bhardwaj की अदालत ने मृतक रांझा राम की विधवा पत्नी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस्तीफा और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वॉलंटरी रिटायरमेंट) के बीच कानूनी रूप से बड़ा अंतर है। इस्तीफे की स्थिति में कर्मचारी स्वेच्छा से अपने सेवा अधिकार छोड़ देता है, जबकि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति में सेवा से जुड़े लाभ सुरक्षित रहते हैं।अदालत ने यह भी पाया कि कर्मचारी ने वर्ष 2003 में अपने पद से इस्तीफा दिया था, जबकि इस मामले में याचिका 15 वर्ष बाद वर्ष 2018 में दायर की गई। कोर्ट ने इसे अत्यधिक देरी का मामला बताते हुए कहा कि इतने लंबे समय बाद ऐसे दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के पति रांझा राम ने Himachal Pradesh Public Works Department में वर्ष 1983 से 2003 तक हेल्पर के रूप में सेवाएं दी थीं। 13 अगस्त 2003 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे विभाग ने स्वीकार कर लिया था। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी ने विभाग से फैमिली पेंशन और अन्य बकाया लाभों की मांग की थी।विभाग द्वारा मांग ठुकराए जाने के बाद इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें फैमिली पेंशन की मांग की गई थी। सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कर्मचारी की नियमित सेवा केवल 6 वर्ष, 7 महीने और 13 दिन ही थी, जबकि पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 वर्ष की नियमित सेवा अनिवार्य है।सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया
