केलांग (रंजित लाहोली, संवाददाता ),
डां रामलाल मार्कंड़ा एक बार फिर लाहौल–स्पीति की राजनीति में अपने मजबूत जनाधार और प्रभाव के कारण चर्चा में हैं। पूर्व मंत्री रहे डॉ. मार्कंडा ने उस समय भी अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया जब उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो। पार्टी से अलग होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरकर अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज करवाई।
निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए डॉ. मार्कंडा ने यह साबित कर दिया कि उनकी ताकत किसी पार्टी के सहारे नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के विश्वास से आती है। चुनाव परिणामों में भले ही वह दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन उन्होंने भाजपा के इंपोर्टेड उम्मीदवार की जमानत जब्त करवा कर यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि लाहौल–स्पीति की जनता स्थानीय नेतृत्व और अपने क्षेत्र से जुड़े नेता को ही प्राथमिकता देती है।
डॉ. मार्कंडा की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनका अपना संगठन लाहौल–स्पीति विकास मंच है। इस मंच के माध्यम से उन्होंने क्षेत्र के लोगों को संगठित किया और विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाया। यही कारण है कि आज भी क्षेत्र में उनका संगठन सक्रिय और प्रभावशाली माना जाता है।
लाहौल-स्पीति जैसे दूरदराज और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में डॉ. रामलाल मार्कंडा ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार आवाज उठाई है। उनकी राजनीतिक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और जनता के भरोसे के दम पर कोई भी नेता बिना बड़े राजनीतिक दल के भी अपनी पहचान और प्रभाव बनाए रख सकता है।
आज भी लाहौल–स्पीति की राजनीति में यदि किसी नेता की जमीनी पकड़ और संगठनात्मक ताकत की चर्चा होती है, तो डॉ. रामलाल मार्कंडा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। क्षेत्र के लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो अपने क्षेत्र की आवाज को मजबूती से उठाने का साहस रखते हैं और विकास को ही अपनी राजनीति का मूल आधार मानते है

