भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े पर बड़ा वार, 10 साल तक की सजा का प्रावधान

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ब्यूरो रिपोर्ट शिमला।

हिमाचल प्रदेश में भर्ती और सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2025 को 9 फरवरी से लागू किया जा रहा है। इस कानून के लागू होते ही नकल करने और कराने वालों पर कड़ी सजा का प्रावधान रहेगा।अधिनियम के तहत भर्ती परीक्षाओं में नकल, प्रश्नपत्र लीक, फर्जीवाड़ा, संगठित गिरोहों की संलिप्तता तथा डिजिटल माध्यमों से की गई धांधली को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। दोषी पाए जाने पर न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर अधिकतम दस वर्ष तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नकल या फर्जीवाड़े के कारण परीक्षा पर हुए पूरे खर्च की वसूली भी दोषियों से की जाएगी।सरकार का कहना है कि इस सख्त कानून से नकल माफिया पर प्रभावी रोक लगेगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता व विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी। यदि किसी सेवा प्रदाता, एजेंसी या परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।कानून के तहत संगठित अपराध की स्थिति में सजा और अधिक सख्त होगी। मामलों की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तर के अधिकारियों को जांच का अधिकार दिया गया है।सरकार का दावा है कि यह कानून प्रदेश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करेगा और योग्यता के आधार पर चयन प्रक्रिया को और मजबूत बनाएगा। गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के मामले सामने आए थे, जिसके बाद सख्त कानून की मांग लगातार उठ रही थी। अब इस अधिनियम के लागू होने से ऐसे मामलों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

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