सिरमौर की आरटीओ ने पेश की ईमानदारी की मिसाल, अपने ही परिवार और विभाग पर की कार्रवाई

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ब्यूरो रिपोर्ट सिरमौर।

सिरमौर जिला में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहीं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) सोना चंदेल ने कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी की एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर न केवल अपने ही परिवार के सदस्य की स्कूटी का चालान काटा, बल्कि अपने ही विभाग के सरकारी वाहन पर भी जुर्माना लगाकर यह साफ संदेश दिया कि कानून सबके लिए समान है।जानकारी के अनुसार आरटीओ सोना चंदेल औद्योगिक क्षेत्र कालाआंब में वाहनों की नियमित जांच पर निकली थीं। जांच के दौरान यह सामने आया कि बैरियर पर तैनात स्टाफ निजी वाहनों का उपयोग कर रहा था। दस्तावेजों की जांच करते हुए उन्होंने कर्मचारियों से आवश्यक कागजात मांगे। इसी दौरान एक कर्मचारी ने साहस दिखाते हुए बताया कि आरटीओ के सरकारी वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) एक्सपायर हो चुका है।यह सुनकर मौके पर मौजूद लोग हैरान रह गए। आमतौर पर ऐसे मामलों में अधिकारी नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आरटीओ सोना चंदेल ने बिना किसी संकोच के अपने ही सरकारी वाहन का 500 रुपये का चालान काट दिया। इसके साथ ही मौके पर ही वाहन का वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र भी बनवाया गया।गौरतलब है कि इससे पहले भी आरटीओ सोना चंदेल अपनों पर कानून का शिकंजा कस चुकी हैं। कुछ समय पहले हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट अभियान के दौरान उनके परिवार के एक सदस्य की स्कूटी पर नंबर प्लेट नहीं पाई गई थी। जानकारी मिलते ही उन्होंने बिना किसी रियायत के तीन हजार रुपये का चालान काट दिया। सूत्रों के मुताबिक इस चालान की राशि बाद में उन्होंने स्वयं अपनी जेब से अदा की।आरटीओ सोना चंदेल का कार्यकाल राजस्व के लिहाज से भी बेहद प्रभावशाली रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में उन्हें चालानों के माध्यम से डेढ़ करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन उन्होंने लगभग ढाई करोड़ रुपये का राजस्व सरकार के खजाने में जमा करवाया। मौजूदा वित्त वर्ष में भी डेढ़ करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब पौने तीन करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जा चुका है।इसी शानदार प्रदर्शन के चलते परिवहन विभाग ने सिरमौर जिला को अतिरिक्त पुरस्कार स्वरूप टोयोटा की हाइब्रिड वाहन प्रदान की है। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आरटीओ सोना चंदेल ने कहा कि यातायात नियम सभी के लिए एक समान हैं। चाहे वाहन सरकारी हो या निजी, या फिर परिवार का ही क्यों न हो—नियमों का पालन करना हर हाल में अनिवार्य है।

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