2026 की दस्तक के साथ बढ़ा निर्माण खर्च, सीमेंट-सरिया के दाम उछले

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ब्यूरो रिपोर्ट डेस्क।

साल 2026 के आगमन के साथ ही हिमाचल प्रदेश के आम जनमानस पर महंगाई का एक और बोझ बढ़ गया है। जहां लोग नए साल से नई उम्मीदें लगाए बैठे थे, वहीं निर्माण सामग्री के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग के ‘अपने घर’ के सपने को और महंगा कर दिया है। प्रदेश में निर्माण के दो प्रमुख आधार—सीमेंट और सरिया—की कीमतों में इजाफे से बाजार से लेकर उपभोक्ताओं तक चिंता बढ़ गई है।
सीमेंट के दाम बढ़े, जेब पर सीधा असर
प्रदेश की प्रमुख सीमेंट कंपनियों ने प्रति बोरी ₹5 की वृद्धि कर दी है। नई दरों के बाद बाजार में सीमेंट के भाव इस प्रकार हो गए हैं—
ACC सुरक्षा: ₹390 से बढ़कर ₹395
ACC गोल्ड: ₹435 से बढ़कर ₹440
अंबुजा सीमेंट: ₹400 से बढ़कर ₹405
अल्ट्राटेक सीमेंट: बढ़कर ₹400 प्रति बैग
डीलरों का कहना है कि उत्पादन लागत और ढुलाई खर्च बढ़ने के चलते कंपनियों पर दबाव है, जिसका असर अब सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
सरिया भी महंगा, एक हफ्ते में ₹500 प्रति क्विंटल की छलांग
सीमेंट के साथ-साथ निर्माण की रीढ़ माने जाने वाले सरिये के दाम भी तेज़ी से बढ़े हैं। बीते एक सप्ताह में सरिये की कीमतों में ₹500 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो सरिया पिछले सप्ताह ₹5500 में उपलब्ध था, वह अब ₹6000 प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है।
राजनीतिक तापमान चढ़ा, विपक्ष का हमला
महंगाई के इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कीमतों में बढ़ोतरी को ‘अमानवीय’ करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अभी भी आपदा के घावों से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। हजारों परिवार पुनर्निर्माण की जद्दोजहद में हैं और ऐसे समय में निर्माण सामग्री के दाम बढ़ाना पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार से मांग की कि वह तुरंत हस्तक्षेप कर कीमतों पर नियंत्रण करे और राहत कार्यों व पुनर्निर्माण से जुड़े लोगों को विशेष छूट प्रदान करे।
आम आदमी की बढ़ी चिंता
निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों से न केवल नए मकान बनाने वालों की चिंता बढ़ी है, बल्कि मरम्मत और छोटे निर्माण कार्य भी महंगे हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि कीमतों पर जल्द अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसका असर रियल एस्टेट और रोजगार पर भी पड़ सकता है।

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