राजकीय महाविद्यालय नेरवा में कौशल-विकास कार्यशाला एवं रोजगार मेला का आयोजन

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शिमला (विकास शर्मा, ब्यूरो चीफ),

आज के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करना या डिग्री प्राप्त करना नहीं रह गया है, बल्कि कौशल, मानसिक सुदृढ़ता, तकनीकी दक्षता और सही करियर मार्गदर्शन ही युवाओं की वास्तविक पहचान बनते जा रहे हैं। इसी दूरदर्शी सोच के साथ राजकीय महाविद्यालय नेरवा में युवाओं को भविष्य के लिए सक्षम, आत्मनिर्भर एवं रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से कौशल-विकास कार्यशाला एवं रोजगार मेला का भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शैक्षणिक गुणवत्ता, करियर मार्गदर्शन और व्यावहारिक रोजगार अवसरों की दृष्टि से वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश का सबसे व्यापक, संगठित और प्रभावशाली आयोजन सिद्ध हुआ।

इस बहुआयामी कार्यक्रम का आयोजन राजकीय महाविद्यालय नेरवा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें 15 से अधिक राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों—राजकीय महाविद्यालय चोपल, कंडाघाट, निरमंड (कुल्लू), संगड़ाह (सिरमौर), जयसिंहपुर (कांगड़ा), राजकीय कन्या महाविद्यालय हमीरपुर, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिमला, दारलाघाट (सोलन), आर.वी.बी.एस. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सीमा, टी.एस. नेगी राजकीय महाविद्यालय पियो (किन्नौर), राजकीय महाविद्यालय धलियारा, एल.बी.एस. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सरस्वती नगर, ग्रीन हिल अभियांत्रिकी महाविद्यालय सोलन तथा ठाकुर शिक्षा महाविद्यालय धलियारा—ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न संस्थानों की यह सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि समन्वय, साझेदारी और साझा दृष्टि के माध्यम से ही युवाओं के लिए ठोस अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम का समन्वय हिमालयन राइज (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाई), मनोविज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला, तथा स्किल लैब्स चंडीगढ़ (सरकार द्वारा अधिकृत कौशल-विकास एवं नियुक्ति संस्था) द्वारा किया गया। इन संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से कार्यक्रम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्वरूप मिला, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को वैश्विक स्तर की सोच, तैयारी और अपेक्षाओं से परिचित होने का अवसर प्राप्त हुआ।

कौशल-विकास कार्यशाला के अंतर्गत दो प्रमुख अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में डॉ. बी. एस. चौहान (अंतरराष्ट्रीय वक्ता) ने डिजिटल तकनीकों के माध्यम से जन्मजात प्रतिभाओं की पहचान विषय पर गहन एवं तथ्यपरक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान, मनोविज्ञान, आंकड़ा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी की प्राकृतिक क्षमताओं, रुचियों और दीर्घकालीन संभावनाओं को पहचाना जा सकता है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में अब करियर चयन से पूर्व इस प्रकार की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को अपनाया जा रहा है, जिससे युवाओं में गलत करियर चयन, मानसिक तनाव और बार-बार नौकरी बदलने की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है। यह सत्र विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी अत्यंत ज्ञानवर्धक और दृष्टि-प्रदायक सिद्ध हुआ।

द्वितीय सत्र में डॉ. हिमेश शर्मा ने भविष्य के करियर एवं रणनीतिक तैयारी विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में केवल परंपरागत नौकरियाँ ही नहीं, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, स्वास्थ्य विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी, डेटा विज्ञान और रचनात्मक उद्योगों में अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे। उन्होंने 10 से अधिक उभरते क्षेत्रों और 15 प्रमुख कौशलों—जैसे प्रभावी संचार, समस्या समाधान, डिजिटल साक्षरता, टीमवर्क, अनुकूलनशीलता और नेतृत्व क्षमता—पर विशेष बल दिया, जो भविष्य की नौकरियों के लिए अनिवार्य माने जा रहे हैं।

कार्यशाला के साथ आयोजित रोजगार मेला विद्यार्थियों के लिए एक सशक्त प्रत्यक्ष संवाद मंच बनकर उभरा। इसमें 20 से अधिक प्रतिष्ठित नियुक्ति संस्थानों एवं मानव संसाधन विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैंकिंग, वित्त, सूचना प्रौद्योगिकी, मीडिया, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल प्रचार, सामग्री लेखन, परामर्श, यात्रा, ई-वाणिज्य, योग एवं आरोग्य जैसे 35 से अधिक कार्य-क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि उद्योग जगत उनसे किस प्रकार की व्यावहारिक दक्षताओं, व्यवहारिक अनुशासन और सतत सीखने की अपेक्षा करता है।

विशेष रूप से 28 एवं 29 दिसंबर 2025 को आयोजित ऑनलाइन साक्षात्कारों में 300 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें 120 से अधिक अंतिम वर्ष अथवा उत्तीर्ण छात्र, 60 शोधार्थी, तथा 80 से अधिक छात्राएँ शामिल रहीं। छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश दिया। विद्यार्थियों को नवीनतम डिजिटल नियुक्ति मंच ‘द ट्यूटर’, संजौली (शिमला) द्वारा उपलब्ध कराए गए, जिनके माध्यम से 50 से अधिक प्रत्यक्ष संवाद, 40 से अधिक जीवन-वृत्तों का प्रारंभिक चयन, तथा 25 से अधिक अनुवर्ती साक्षात्कार सुनिश्चित किए गए।

कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि प्रभावी जीवन-वृत्त निर्माण, संचार कौशल विकास, साक्षात्कार शिष्टाचार और भविष्य की नौकरियों हेतु आवश्यक क्षमताओं पर आयोजित विशेष सत्र रहा। इस सत्र में विद्यार्थियों को तीन-स्तरीय जीवन-वृत्त प्रारूप, पाँच प्रमुख संचार मापदंडों, तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे साक्षात्कार मानकों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार हुआ और वे स्वयं को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित हुए।

इस अवसर पर हिमालयन राइज द्वारा प्रारंभ की गई 15 नई सेवा पहलों—जैसे जीवन–३६० मार्गदर्शन केंद्र, शैक्षिक प्रतिभा खोज प्रयोगशाला, न्यूरोग्रो स्मृति एवं मस्तिष्क विकास केंद्र, हेल्थशील्ड दीर्घायु एवं पोषण परामर्श क्लिनिक, माइंडईज़ ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य परामर्श कक्ष, करियरमैप–2040 करियर मार्गदर्शन केंद्र, स्किलमास्टर व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण अकादमी, डीएनए पहचान एवं स्वास्थ्य रूपरेखा केंद्र, हीलफ्लेक्स भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवा, प्रो-हेल्थ दंत एवं भौतिक चिकित्सा संपर्क मंच, एग्ज़ामचैम्प विद्यार्थी उत्कृष्टता केंद्र, क्विकहेल्प गृह-सहायता एवं सेवाएँ मंच, ट्रैवल हिमालय साहसिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र, मेडप्लांट औषधीय पादप एवं आयुर्वेदिक परामर्श स्टूडियो, तथा न्यूरोफोकस एकाग्रता, संचार एवं व्यक्तित्व विकास केंद्र—की विस्तृत जानकारी दी गई। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं के शैक्षणिक, मानसिक, शारीरिक और व्यावसायिक विकास को एकीकृत रूप से सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम की एक और अत्यंत उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से आई सुश्री नेहा सहल, श्री यमन चौहान, सुश्री तान्या गुलेरिया तथा श्री शिवम सूद द्वारा चयनित विद्यार्थियों के लिए विशेष मस्तिष्क व्यायाम एवं मानसिक क्षमता संवर्धन सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में उच्च एकाग्रता, स्मरण शक्ति और मानसिक संतुलन की संभावनाओं वाले विद्यार्थियों को वैज्ञानिक मस्तिष्क अभ्यास, मानसिक फिटनेस तकनीकें, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन आधारित गतिविधियाँ करवाई गईं। विद्यार्थियों ने इन सत्रों को अत्यंत प्रेरणादायक और जीवनोपयोगी बताया।

कार्यक्रम से जुड़े सभी प्रधानाचार्यों, नियुक्ति प्रकोष्ठ संयोजकों, तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने हिमालयन राइज, स्किल लैब्स चंडीगढ़ एवं आयोजक संस्थानों के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश के नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए सबसे सफल, सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुख आयोजन बताया।

अंत में, राजकीय महाविद्यालय नेरवा के प्रधानाचार्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, स्पष्ट दृष्टि, मानसिक सुदृढ़ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप आवश्यक कौशल भी प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में महाविद्यालय द्वारा ऐसे कौशल-विकास, नवाचार और रोजगारोन्मुख कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाएगा, ताकि हिमाचल प्रदेश के युवा न केवल राज्य और देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर सकें।

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