जलवायु प्रतिरोधी रणनीतियों और उपायों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा”

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शिमला (विकास शर्मा, ब्यूरो चीफ),

भा.वा.अ.शि.प.-हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला में “जलवायु प्रतिरोधी रणनीतियों और उपायों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 10.12.2025 से 12.12.2025 तक आयोजन किया जा रहा है । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न विभागो जैसे वन विभाग, पशु पालन विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग और अन्य विभागों से कुल 24 अधिकारियों (वन परिक्षत्र अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, बागबानी विकास अधिकारी, बागवानी विस्तार अधिकारी (एचईओ), एफईओ, पशु चिकित्सा अधिकारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ (एसएमएस) व स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि, ग्राम विकास समिति (वीडीसी) के सदस्य और गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के सदस्यों ने भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहारादून में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सलेन्स फॉर सस्टेनबल लैंड मैनेजमेंट, द्वारा प्रायोजित गया, जिसका मुख्य उद्देशय विभिन्न विभागो के अधिकारियों को एक मंच पर इकट्ठा कर जलवायु प्रतिरोधी रणनीतियों और उपायों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की कारगर रणनीतियों और वैज्ञानिक विधियों के बारे में जानकारी प्रदान करना है । हिमाचल प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य अरणयपाल डॉ. संजय सूद, भा॰व॰से॰ ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल लैंड डेवलपमेंट (CoE-SLM), देहरादून के निदेशक डॉ. राजेश शर्मा भी स्पेशल गेस्ट के तौर पर उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम के आरंभ में, संस्थान के निदेशक डॉ॰ मनीषा थपलियाल ने मुख्य अतिथि व सभी प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों तथा भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद में सेंटर ऑफ एक्सलेन्स फॉर सस्टेनबल लैंड मैनेजमेंट को स्थापित करने पर रोशनी डाली । वर्तमान में, यह केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर भूमि क्षरण को रोकने और सतत भूमि प्रबंधन के प्रयासों को समन्वित करने में प्रमुखता से कार्य कर रहा है पर प्रकाश डाला । इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम की थीम पर बताते हुए हिमालय के परिस्थितिकी, सामाजिक, कल्चरल और स्पिरिचुअल महत्व पर बात की और जलवायु परिवर्तन से हिमालय की नाजुक इकोलॉजी पर पड़ने वाले प्रभावके बारे में गंभीर चिंता जताई। उन्होंने प्रतिभागियों से रिसोर्स पर्सन/एक्सपर्ट्स से खुलकर बातचीत करने को कहा ताकि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम से सही में लाभ मिल सके।
इसके पश्चात, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ आर.के.वर्मा ने प्रशिक्षण मॉड्यूल को प्रतिभागियों के साथ सांझा किया और कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में डॉ यशवंत सिंह परमार औद्योनिकी एवं वानिकी विश्व विद्यालय नौणी, आई.सी.ए.आर- केंद्रीय मृदा एवं जल अनुसंधान संस्थान,चंडीगढ़, सेंटर ऑफ एक्सलेन्स फॉर सस्टेनबल लैंड मैनेजमेंट, देहारादून, HIMCOSTE, शिमला, हिमाचल प्रदेश वन विभाग व डबल्यूआईआई के विषय – विशेष्यज्ञों व संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा अलग अलग विषयों पर ज्ञान और अनुभवों को सांझा करेंगे। डॉ.वर्मा द्वारा जानकारी दी गई कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने और सतत भूमि प्रबंधन पर नवाचरों के बारे में अवगत करवाने के लिए डॉ यशवंत सिंह परमार औद्योनिकी एवं वानिकी विश्व विद्यालय नौणी, सोलन व कृषि विज्ञान केंद्र, कंडाघाट में क्षेत्रीय भ्रमण के लिए भी ले जाएंगे।

अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में, डॉ. संजय सूद ने हिमालय के महत्व के बारे में विस्तार से बताया और यहां की नाजुक परिस्थितिकी, जैवविविधता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि एशिया में लगभग एक अरब लोगों की जीवनरेखा और आजीविका को बनाए रखने के लिए हिमालयी पारितंत्र की अहम भूमिका है । इसके अलावा, डॉ. सूद ने क्लाइमेट चेंज के असर और हिमालय इकोलॉजी एवं वातावरण को हानि पहुंचाने वाली मानवीय कारकों के बारे में प्रकाश डाला । उन्होंने संस्थान और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल लैंड मैनेजमेंट (COESLM), देहरादून की प्रसंशा व्यक्त करते हुए कहा की, प्रशिक्षण कार्यक्रम की विषय वस्तु पूर्ण रूप से प्रासंगिक और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप है और प्रतिभागियों को निश्चित ही फायदेमंद साबित होगा ।
सेंटर ऑफ एक्सलेन्स फॉर सस्टेनबल लैंड मैनेजमेंट, देहरादून के निदेशक और विशेष अतिथि डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि CoE-SLM, देहरादून क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भूमि अपर्दन की समस्याओं को हल करने के लिए अलग अलग विभागों को इकजुट होकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ट्रेनिंग प्रोग्राम की थीम बहुत सोच-विचार के बाद चुनी गई है और यह क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़ी है। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीति बनाने के लिए विभिन्न विभागों से समन्वय और जनिकारियों को सांझा करने की आवश्यकता है।
पहले दिन के तकनीकी सत्र के दौरान, डॉ. संजय सिंह, वैज्ञानिक-ई देहरादून, डॉ. वनीत जिष्टू, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, एचएफआरआई, डॉ. एसएस रंधावा प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी (सेवानिवृत) हिमकोस्ट और दिनेश पॉल (डीसीएफ, मुख्यालय) वन विभाग सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने भूमि क्षरण तटस्थता, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र के कार्य, पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन की भेद्यता, संस्थागत और नीति समर्थन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी बातें साझा कीं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के उदघाटन सत्र का संचालन श्रीमति शिल्पा, मुख्य तकनीकी अधिकारी द्वारा किया गया और

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