संस्कृत पदनाम पर सरकार व शिक्षा विभाग का दोहरा रवैया उजागर

0
216

शिमला (विकास शर्मा, ब्यूरो चीफ),

हिमाचल प्रदेश राजकीय भाषाई अध्यापक संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा TGT Hindi और TGT संस्कृत पदों को लेकर अपनाए जा रहे दोहरे रवैए पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है। संघ के राज्य अध्यक्ष हेमराज ठाकुर ने कहा कि सरकार ने 20 अगस्त 2022 को जारी अधिसूचना के माध्यम से LT और शास्त्री पदों को आधिकारिक रूप से TGT Hindi तथा TGT संस्कृत घोषित किया था, परन्तु आज तक अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेजों में वही पुराने पदनाम दर्शाए जा रहे हैं।

संघ ने बताया कि—20/08/2022 को सरकार ने औपचारिक रूप से LT और शास्त्री पदों को TGT Hindi और TGT संस्कृत घोषित किया।04/09/2023, माननीय उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश ने CWP 2171/2023 में यह स्पष्ट निर्देश दिए कि इन दोनों पदों को 20 अगस्त 2022 से सभी वित्तीय, पदोन्नति व अन्य लाभ अन्य TGT वर्गों की तर्ज पर दिए जाएँ।20/05/2024, सचिव शिक्षा ने विभागीय आदेश जारी कर फिर पुष्टि की कि LT और शास्त्री को TGT Hindi और TGT संस्कृत नाम से ही दर्ज किया जाए तथा प्रवक्ता (स्कूल न्यू) व मुख्य अध्यापक पदोन्नति चैनल के लिए वरीयता 20/08/2022 से लागू मानी जाए।हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने भी TET परीक्षा LT/शास्त्री नामों के स्थान पर TGT Hindi और TGT संस्कृत नाम से करवाना शुरू कर दिया है।फरवरी 2025 में सरकार ने भर्ती एवं पदोन्नति नियम नए पदनामों के अनुरूप संशोधित कर दिए।

29/07/2025 को निदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी उप निदेशकों को आदेश भेजे कि इन पदों को पे बिल, सर्विस बुक, ई-सर्विस बुक, उपस्थिति रजिस्टर, मानव सम्पदा पोर्टल, UDISE+ आदि सभी अभिलेखों में “TGT Hindi” और “TGT संस्कृत” नाम से ही दर्ज किया जाए।

फिर भी कई जिलों में JBT से पदोन्नति पुराने LT/शास्त्री नाम परसंघ ने आरोप लगाया कि—अनेक स्कूलों में आज भी उपस्थिति रजिस्टर, सर्विस बुक, पे बिल और ऑनलाइन पोर्टलों पर LT और शास्त्री ही लिखे जा रहे हैं।जिलों में JBT से पदोन्नति भी LT पदनाम पर की जा रही है, जो विभागीय आदेशों की खुली अवहेलना है।कई प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक न्यायालय व विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अनुपालना नहीं कर रहे।

विधानसभा में भी पुराने नामों का उपयोग—संघ ने उठाए गंभीर प्रश्नसंघ ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार ने हाल ही में शीतकालीन सत्र धर्मशाला में पेश किए गए दस्तावेजों में भी इन पदों को पुनः LT और शास्त्री के रूप में अंकित किया है।इस पर संघ अध्यक्ष हेमराज ठाकुर ने सवाल उठाया—“क्या सरकार और शिक्षा विभाग माननीय उच्च न्यायालय को गुमराह कर रहे हैं, या फिर विभागीय अधिकारी और स्कूल मुखिया सरकार के आदेशों को मानने से इंकार कर रहे हैं?”
वहीं दूसरी ओर आज संघ के राज्य सचिव अर्जुन सिंह ने हिमाचल विश्वविद्यालय के कुलपति को एक मांगपत्र सौंपा। संघ के बैनर तले कुलपति से यह मांग की गई जिसमें सामान्य शास्त्री को दूरवर्ती शिक्षा केन्द्र के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार विशेष प्रमाण-पत्र (सेवारत प्रशिक्षित अध्यापक) को आधार मानते हुए बी0एड0 के लिए पात्र समझा जाए। संघ की इस बात को गंभीरता से लेते हुए कुलपति ने विश्वविद्यालय की आगामी बैठक में इस मसले को हल करने की बात संघ के राज्य महासचिव अर्जुन सिंह से सांझा की।

संघ ने सरकार से लिखित स्पष्टीकरण और आदेशों के कड़ाई से पालन की माँग कीप्रेस विज्ञप्ति में संघ ने माँग की कि— सरकार और शिक्षा विभाग इस संदर्भ में तत्काल लिखित स्पष्टीकरण जारी करे।सभी स्कूलों में एक समान रूप से TGT Hindi और TGT संस्कृत पदनाम दर्ज किया जाए। 20/08/2022 से लागू लाभों और पदोन्नति वरीयता की अनुपालना सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना पर कड़ी कार्रवाई की जाए। संघ ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र और स्पष्ट कार्रवाई नहीं करती, तो अध्यापक वर्ग आगे की रणनीति बनाने को बाध्य होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here