ब्यूरो रिपोर्ट नाहन
अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेले की वो प्राचीन परंपरा इस बार टूट गई, जिसमें हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री मेले के दौरान पवित्र स्थल पर रात्रि विश्राम करता है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू श्री रेणुका जी पहुंचने के हर संभव प्रयास के बावजूद यहां नहीं पहुंच पाए।धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो मुख्यमंत्री मेले में रात नहीं गुजारता, वह दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर पाता। इस मान्यता और राजनीतिक परंपरा के बीच इस बार परिस्थितियों ने रोड़ा डाल दिया।सीएम सुक्खू दोपहर 1:40 बजे दिल्ली से हेलीकॉप्टर द्वारा अंबाला पहुंचे। लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उड़ान आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सड़क मार्ग से आने पर भी विचार हुआ, पर देर शाम कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान और विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार ने देव पालकियों को कंधा देकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। वहीं, मुख्यमंत्री ने वर्चुअली 29.50 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।यह परंपरा इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्रियों ने हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, रेणुका जी में रात्रि विश्राम का संकल्प हमेशा निभाया। कई बार आचार संहिता के दौरान भी विशेष अनुमति लेकर मुख्यमंत्री यहां पहुंचे और श्री रेणुका जी की शरण में रात गुजारी।इस वर्ष यह जाज्वल्य परंपरा टूटने से राजनीतिक गलियारों और धार्मिक भावनाओं में हलचल देखी जा रही है।

