श्री रेणुका जी (सिरमौर)। राजकीय महाविद्यालय श्री रेणुका जी, ददाहू के हिन्दी विभाग द्वारा “लोक भाषा का महत्त्व” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों — छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश — से प्रतिष्ठित विद्वानों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों ने भाग लिया और अपने शोधपत्रों के माध्यम से लोक भाषा, लोक संस्कृति तथा साहित्यिक अभिव्यक्ति के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया। इसकी संचालक प्रो नीलम कुमारी तथा आयोजन सचिव डॉ मिल्ला राम रहे.
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पवन कुमार ने की। इस अवसर पर पद्मश्री श्री विद्यानन्द सरैक जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वे एक प्रतिष्ठित साहित्यकार, अनुवादक और लोकसंस्कृति के सशक्त संवाहक हैं। बीज वक्ता के रूप में डॉ. शोभा रानी, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला ने लोकभाषा की सामाजिक भूमिका और उसके सांस्कृतिक प्रभाव पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. धनजी प्रसाद, प्रोफेसर (भाषाविज्ञान), केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा तथा विशिष्ट सान्निध्य अतिथि के रूप में डॉ. चेतराम गर्ग, निदेशक एवं संगठन सचिव, ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी (हमीरपुर) ने अपनी विद्वतापूर्ण उपस्थिति से सत्र को गौरवान्वित किया।




प्रथम दिवस में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. चेत राम गर्ग ने की, जबकि दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ. राजन तंवर, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, राजकीय महाविद्यालय अर्की ने की। इन सत्रों में विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर “लोकभाषा” के साहित्यिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक पक्षों पर समृद्ध विमर्श किया।
दूसरे दिवस में तीसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. वंदना श्रीवास्तव, अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, जयनारायण पी.जी. कॉलेज, लखनऊ ने की, जबकि चौथे सत्र की अध्यक्षता डॉ. जयचन्द ‘उराड़ुवा’, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, नाहन महाविद्यालय ने की। इन सत्रों में शोधार्थियों ने लोक संस्कृति, लोकगीत, लोककथाओं और क्षेत्रीय भाषाओं की अभिव्यक्ति पर अपने विचार साझा किए।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के सुप्रसिद्ध लोकगायक, संगीताचार्य एवं संस्कृतिकर्मी डॉ. कृष्णलाल सहगल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. शिवदयाल पटेल, नवीन शासकीय महाविद्यालय बेलतरा, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़) तथा मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. जयचन्द ‘उराड़ुवा’ ने अपने प्रेरक विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया और समस्त प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
दो दिनों तक चले इस शैक्षणिक और सांस्कृतिक उत्सव में लोक भाषा की प्रासंगिकता, उसकी अभिव्यक्ति क्षमता और आधुनिक संदर्भों में उसकी भूमिका पर सार्थक विमर्श हुआ। कार्यक्रम को प्रतिभागियों और अतिथियों ने अत्यंत सफल, सार्थक और स्मरणीय बताया।

