भरमौर के दुर्गेठी पंचायत की कमला आपदा में लाखों महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा स्रोत

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भरमौर (ओ पी शर्मा, संवाददाता),

भरमौर के ग्राम पंचायत दुर्गेठी के गांव दुर्गेठा की कमला देवी पिछले महीने आई आपदा में मणिमहेश यात्रियों के लिए मसीहा बनकर सामने आई। आपदा के दौरान फंसे यात्रियों के लिए कमला देवी ने ना केवल अपने घर में पनाह दी बल्कि उनका खाने-पीने और सेहत का भी खूब ख्याल रखा। जिसके लिए अतिथि देवो भव: किसी सपने को साकार करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उन्हें शिमला में सम्मानित भी किया है।। इस दौरान कमला देवी ने घायल मणिमहेश यात्रियों के लिए अपने घर में उनका फर्स्ट एड भी किया। हालांकि कुछ महीने पहले ही उनके पति ओम प्रकाश की दुखद मृत्यु हुई है जो पेशे से सरकारी ठेकेदार थे। लेकिन बावजूद इसके वह आपदा के इस दौर में अपनी पीड़ा को भुलाकर श्रद्धालुओं की पीड़ा को दूर करने में लगी रही। 28 अगस्त से जब पूरे प्रदेश में लैंडस्लाइड वह बारिश के कारण जगह-जगह सड़के बंद थी और मनी महेश श्रद्धालु आश्रय के लिए तरस रहे थे। उस दौरान कमला देवी ने इस रास्ते से गुजरने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने रहने व उनकी सेहत का भी खूब ख्याल रखा। वह सभी यहां से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए दिन-रात खड़ी रही और जब सोने के लिए कपड़े कम पड़ जाते तो पड़ोसियों से कपड़े मांग कर लाती ताकि कोई भी बिना कंबल ना रहे। उन्होंने एक दिन में डेढ़ सौ से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने खाने-पीने का प्रबंध किया।

इसके बदले में जब यहां पर रुकने वाले श्रद्धालुओं ने उन्हें बदले में पैसे देने चाहे तो उन्होंने कहा यह सेवा है बिजनेस नहीं। उनकी इस सेवा से यह सिद्ध कर दिया की नई सिर्फ परिवार ही नहीं मानवता को भी संवार सकती है। गौरतलब है मनीमहेश यात्रा के दौरान 27 अगस्त को दुर्गेठी व लूणा पुल में भारी लैंड स्लाइड के चलते रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया था। लिहाजा यात्री दुर्गेठी से उनके गांव के रास्ते से होकर पैदल लूना पहुंच रहे थे। इस दौरान यात्रियों को तकरीबन 2 किलोमीटर का सफर करने के लिए 8 किलोमीटर का वाया होकर पहुंचना पड़ रहा था। इस दौरान के यात्रियों को चोटें भी आई। कमला देवी ने उनका अपने घर में फर्स्ट ऐड भी किया ताकि उनका दर्द कम हो सके। हालांकि इस दौरान इस क्षेत्र के सभी गांव वासियों ने मणिमहेश यात्रा के दौरान आए श्रद्धालुओं का भरपूर ख्याल रखा है और जितनी सेवा हो सकती है वह दिल खोलकर की है। किसी ने खाना खिलाया तो किसी ने सेब किसी ने लंगर लगाया तो किसी ने खिलाई खीर।

नारी के इस जब्बे को हिमाचल 84 टीवी भी सलाम करता है। जहां कई जगह आपदा के दौरान लोगों ने इसे अवसर के तौर पर लिया तो वहीं पर कई जगह लोगों ने मानवता की मिसाल को पेश कर अतिथि देवो भव: की नई परिभाषा को जन्म दिया है।

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