पँजाब विधान सभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने विधान सभा सचिवालय पहुँचकर हिमाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर पँजाब विधान सभा की विशेषाधिकार समिति के सभापति कुलवंत सिंह पंडोरी, पँजाब विधान सभा की याचिका समिति के सभापति मंजीत सिंह बिलासपुर तथा पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संधवा भी मौजूद थे। विधान सभा अध्यक्ष ने सभी अतिथियों का शॅाल व टोपी भेंटकर स्वागत किया । शिष्टाचार भेंट के दौरान पँजाब विधान सभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने पँजाब विधान सभा की संसदीय प्रणाली व क्रिया कलापों की विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां को जानकारी दी। इस अवसर पर बैठक में मौजूद पँजाब विधान सभा की दोनों समितियों के सभापति ने पँजाब विधान सभा की समितियों की कार्यप्रणाली तथा आन्तरिक प्रक्रिया के बारे भी पठानियां को अवगत करवाया। बैठक उपरान्त पँजाब विधान सभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान तथा दोनों समितियों के सभापति ने सदन को भी देखा । इस अवसर पर सदन में हि0प्र0 विधान सभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने उन्हें ई-विधान प्रणाली, तथा कौंसिल चैम्बर के गौरवशाली इतिहास, हि0प्र0 विधान सभा की उच्च परम्पराओं तथा इसकी गरिमा के बारे जानकारी दी। पठानियां ने कहा कि कौंसिल चैम्बर का निर्माण वर्ष 1920 से 1925 के बीच राष्ट्रीय असैम्बली के लिए किया गया था। विठ्ठलभाई पटेल राष्ट्रीय विधान मण्डल के प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे तथा महिलाओं को मत देने के अधिकार का प्रस्ताव भी यहीं पारित हुआ था।पठानियां ने कहा कि विधान मण्डल का अपना स्वतन्त्र सचिवालय हो इसकी व्यवस्था भी विठ्ठलभाई पटेल के द्वारा ही की गई थी। पठानियां ने कहा कि सदन में मौजूद वर्मा टीक से बने अध्यक्ष के आसन (कुर्सी ) को वर्ष 1925 में वर्मा सरकार द्वारा तत्कालीन बर्तानिया सरकार को उपहार स्वरूप भेंट किया गया था। पँजाब विधान सभा अध्यक्ष ने पठानियां की भवन के रख-रखाव के लिए भरपूर प्रशंसा की तथा ई-विधान प्रणाली की बधाई भी दी। उसके पश्चात दोनों विधान सभाओं के अध्यक्षों ने हि0प्र0 के मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू से सचिवालय पहुँचकर शिष्टाचार भेंट की तथा उन्हें पँजाब विधान सभा की कार्यप्रणाली तथा क्रिया-कलापों की जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने दोनों अध्यक्षों को शॉल व टोपी भेंटकर सम्मानित किया और हिमाचल तथा पँजाब राज्य के कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर पठानियां ने कहा कि पँजाब तथा हिमाचल प्रदेश का गहरा नाता रहा है तथा 1 नवम्बर 1966 से पहले काँगड़ा और पहाड़ी क्षेत्र का काफी हिस्सा पँजाब में सम्मिलित था।

