नेपाल के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश बागवानी विकास परियोजना का किया दौरा

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शिमला (विकास शर्मा, ब्यूरो चीफ),

रविवार को नेपाल के 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें किसान और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हैं, उन्होंने हिमाचल प्रदेश में प्रचारित की जा रही उच्च घनत्व सेब की खेती की अवधारणा और मॉडल को समझने के लिए हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना (विश्व बैंक वित्त पोषित) का दौरा किया। विभिन्न क्षेत्रों में नेपाल व हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों के बीच भौगोलिक समानताएं हैं।

बागवानी विकास परियोजना के टीम लीडर डॉ. प्रबल के चौहान, ने परियोजना के तहत कार्यान्वित की जा रही गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने उच्च घनत्व खेती को बढ़ावा देकर राज्य के फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए परियोजना के अंतर्गत किए जा रहे प्रयत्नों पर प्रकाश डाला जिसमें पौधशाला प्रबंधन एवं पौधों के प्रवर्धन (30 लाख पौधों का आयात), सिंचाई संरचना का निर्माण (13000 है. को सिंचित क्षेत्र में लाना), अनुसंधान एवं विकास की पहल (डॉ वाई एस परमार विश्वविद्यालय, सोलन द्वारा उच्च घनत्व के लिए Package of Practices का बनाना ), मूल्य संवर्धन और कृषि-उद्यम विकास (एचपीएमसी की भंडारण और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए सीए स्टोर, ग्रेडिंग पैकिंग इकाइयों, प्रसंस्करण इकाइयों का निर्माण), बाजार विकास (मार्केटिंग बोर्ड में 6 मंडियों का उन्नयन और 3 नयी मंडियों की स्थापना), सम्मिलित रहे।

यह समूह ‘नेपाल के करनाली क्षेत्र में जैविक हाईलैंड सेब और अखरोट की खेती के लिए सार्वजनिक और निजी हितधारकों की क्षमता निर्माण’ पर केंद्रित 10-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहा है। ये भारत और नेपाल के विदेश मंत्रालयों के बीच सहयोगात्मक प्रयास हैं, डॉ. वाईएस परमार इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायक हैं, जहां अधिकारी नेपाल के किसानों को सेब, अखरोट और कीवी की जैविक खेती के बारे में बता रहे हैं और प्रशिक्षित कर रहे हैं।

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