रुकमणी विवाह, सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष के साथ श्रीमद् भागवत कथा सम्पन्न

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सोलन (कमलजीत),

विश्व कल्याण के लिए किया गया विश्व कल्याण की कामना से चामत-भड़ेच पंचायत के दयारशघाट में श्रीमद् भागवत कथा का अयोजन किया गया था, जो सात दिन तक चलता रहा | आज अंतिम दिन आचार्य राहुल शर्मा ने विवाह, सुदामा चरित्र व परीक्षित मोज्ञ के साथ ही कथा को विराम दिया | व्यासपीठ से आचार्य राहुल शर्मा ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा यदि हमारे जीवन में भी सुदामा जैसा संतोष आ जाए, तो जीवन सुखी बन जाए | सुदामा महाज्ञानी होने के साथ साथ परम संतोषी थे | जब वह पत्नी के कहने पर अपने मित्र भगवान श्रीकृष्ण से मिलने गए, तो उनके मन में किसी भी वस्तु का लोभ नहीं था | उन्होंने कहा कि भगवान ने स्वयं उनके चरण आसुओं से धाेए और माता लक्ष्मी उनके लिए स्वयं पानी ला रही थी। ऐसे में उनसे अधिक धनवान कौन होगा | उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से पांडवों ने राजसूय यज्ञ करवाया इस यज्ञ में भीम स्वयं भेजन बनाने का कार्य कर रहे थे | द्रौपदी सभी को भोजन परोसने का कार्य कर रही थी और भगवान स्वयं जूठी पत्तल उठा रहे थे | इससे यह संदेश मिलता है कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, इसमें दुर्योधन को कोषाध्यक्ष बनाया गया था, ताकि वह पांडवों का धन दान में अधिक से अधिक देता रहे। इसके बाद परीक्षित को मोक्ष के साथ ही कथा को विराम दिया गया | इस आयोजन के यज्ञाचार्य नरेश शर्मा ने बताया कि कथा को विराम दिया गया इस आयोजन में ब्रह्मचारी बालक रूद्र, अरनव, सुकृत, अरुण, सिद्धार्थ, पारस, कुश, आयुष, चिन्मय, लक्ष्य, नमन, रिशु, हिमांशु अपनी स्वैच्छिक सेवाएं दी | इसके अलावा उपाचार्य सु़शील शर्मा, सहायक आचार्य डा. मनोज शर्मा, अनिल शर्मा, नरेंद्र शर्मा, उमेश, पंकज, पद्मदेव, योगेंद्र शर्मा, सत्यप्रकाश व सुरेंद्र शर्मा धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए निशुल्क सेवाएं प्रदान की सैकड़ों ग्रामीणों ने कथा का आनंद उठाया व इसके पश्चात प्रसाद भी ग्रहण किया |

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