हाटियों ने फिर भरी हुंकार, केंद्रीय कानून जल्द लागू करें सरकार

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सिरमौर के गिरिपार में बसने वाले हाटी समुदाय को केंद्र सरकार ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे दिया है। इस संबंध में 4 अगस्त को कानून बन गया। लेकिन राज्य सरकार अनुसूचित जनजाति संशोधन कानून को हिमाचल प्रदेश में लागू नहीं कर रही है। 2 महीने से ज्यादा समय से मामला लटकाने से समुदाय के लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। हाटी समुदाय ने फिर हुंकार भरी है। अगर कानून तत्काल लागू न हुआ तो बड़ा जन आंदोलन छेड़ेंगे। इस संबंध में हाटी विकास मंच के पदाधिकारियों ने अध्यक्ष प्रदीप सिंगटा, मुख्य प्रवक्ता डॉ रमेश सिंगटा, सलाहकार मदन तोमर की अगुवाई में शिमला में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और जनजातीय विकास विभाग के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा, विक्रम नेगी संयुक्त सचिव जनजातीय विकास विभाग से राज्य सचिवालय में मुलाकात की। इस दौरान आला अफसरों को ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें हाटी को ST का दर्जा दिलाने के लिए अधिकारियों के योगदान को सराहा गया। लेकिन क्रियान्वयन करने में देरी होने पर रोष भी जताया गया।


प्रदेश सरकार ने पहले लॉ डिपार्टमेंट की ओपिनियन ली। इसके बाद इसी मामले को फिर से केंद्र सरकार को भेजा गया है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय को भेजे गए पत्र में पूछा गया है कि क्या संशोधित कानून में अनुसूचित जाति को बाहर रखा गया है या नहीं.. इससे पहले लॉ डिपार्टमेंट से जानना चाहा था कि हाटी है कौन? जबकि केंद्र सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने पहले ही 22 अगस्त को हिमाचल प्रदेश सरकार को पत्र लिखा था और इसमें संशोधित कानून को लागू करने के निर्देश दिए थे। कानून लागू न होने से छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिल पा रही है और ना ही वह नौकरियों में इसका लाभ ले पा रहे हैं। बिना ST सर्टिफिकेट के उन्हें बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है।

हाटी समुदाय ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल कानून को लागू न किया तो वह फिर से महाखुमलियों के माध्यम से सड़कों पर उतरेंगे। वैसे हालात के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। गौरतलब है कि हाटी विकास मंच ने इससे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सरकारी आवास ओक ओवर में मुलाकात की थी। उन्होंने तब आश्वासन दिया था कि वह कानून को जल्द लागू करेंगे। मंच के पदाधिकारियों ने इसी साल अप्रैल महीने में शिमला प्रवास के दौरान राष्ट्रपति महामहिम द्रोपति मुर्मू से भी मुलाकात की थी। हाटी मामले में देश के राष्ट्रपति से की गई यह पहली मुलाकात थी।

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