मंडी (नितेश सैनी/संवाददाता),
ऋषि-मुनियों और देवी-देवताओं की भूमि सुंदरनगर में जिला के प्राचीन भगवान जगन्नाथ अपने श्रद्धालुओं से रू-ब-रू हुए। सुंदरनगर के हंडेटी स्थित जगन्नाथ मंदिर से जंगमबाग तक रथयात्रा के सैकड़ों लोग भागीदार बन भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। हंडेटी से जंगमबाग तक निकलने वाली इस रथयात्रा में बलीभद्र और मां लक्ष्मी भी साथ रहे। जंगमबाग में एक दिन का विश्राम करने के बाद वीरवार को विशाल भंडारे के बाद भगवान जगन्नाथ, बलीभद्र और मां लक्ष्मी संग वापिस हंडेटी मंदिर में वापिस लौट जाएंगे। गौरतलब है कि जिला मंडी के सुंदरनगर में मनाया जाने वाला यह पर्व आषाढ़ मास के दो प्रविष्टे से ओडिशा के पुरी में मनाए जाने वाले जगन्नाथ पर्व की तर्ज पर ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। जगन्नाथ मंदिर हंडेटी में निर्मित इस प्राचीन मंदिर का निर्माण 250 वर्ष पूर्व हुआ था। यहां भगवान जगन्नाथ, बलीभद्र और मां लक्ष्मी चंदन की लकड़ी से निर्मित हैं। हर वर्ष सुंदरनगर में उनकी रथयात्रा निकाली जाती है। मान्यतानुसार एक फकीर इस मूर्ति को बेचने के लिए ओडिशा के तट से सुंदरनगर लाए थे। इस मूर्ति को बेचने के लिए सुकेत रियासत के कोर्ट में सुनवाई के दौरान 500 रुपए का प्रस्ताव रखा गया। एक हजार रुपए में मूर्ति कुल्लू के राजा बेचने पर बात हुई। लेकिन फकीर ने मूर्ति को कुल्लू ले जाकर एक हजार रुपए में वहां के राजा को बेचने को लेकर मना कर दिया। इसके बाद फकीर की मृत्यु हो गई। फिर राजा के आदेशों के तहत मूर्ति को एक भवन में स्थापित कर पूजन के पुजारी का चयन किया गया। इसके पश्चात मंदिर निर्माण के लिए राजकीय कोष से पांच सौ रुपए खर्च कर भूमि प्रदान की गई।
भगवान जगन्नाथ मंदिर हंडेटी के मुख्य पुजारी रुपेश शर्मा ने कहा कि इस रथयात्रा में भगवान के रथ को खींचकर लोग पूण्य के भागीदार बनते हैं। यह मंडी जिला की सबसे प्राचीन भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा है। इस रथयात्रा के बाद अंतिम दिन गुरुवार को जंगमबाग में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा और भगवान बलीभद्र और मां लक्ष्मी संग मंदिर में वापस लौट जाएंगे।

