मंडी (नितेश सैनी/संवाददाता),
डेढ़ दशक पहले यदि आपको कोई सर्टिफिकेट बनवाना होता तो आपको इसके लिए कई कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब पूरे प्रदेश में लोक मित्र केंद्र खुलने से लोगों को यह सुविधा घर द्वार पर मिल रही हैं। पिछले कुछ दिनों से इन लोक मित्र केंद्र संचालकों पर जिला में सर्टिफिकेट के बदले अधिक शुल्क वसूलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। शुक्रवार को लोक मित्र संचालक महासंघ के बैनर तले जिला के लोक मित्र केंद्र संचालक उपायुक्त मंडी अरिंदम चौधरी से मिले और उन पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया। महासंघ का कहना है कि पिछले कई सालों से सरकार ने जो रेट निर्धारित किए हैं उन्हीं के आधार पर ही लोगों से शुल्क वसूला जा रहा है। स्कैनिंग से लेकर प्रिंटिंग तक के अलग-अलग रेट निर्धारित हैं, जिनका 87 रुपये के आसपास बनता है। जिसके बारे में उच्च अधिकारियों को पहले भी अवगत करवाया गया है। महासंघ का कहना है कि सरकार ने जो रेट निर्धारित किए हैं उन्हें तो महीना जारी कर एकमुश्त दिया जाए। सरकार ने जो रेट तय किए हैं उनसे अधिक संचालकों का खर्चा हो जाता है, क्योंकि यह रेट है पिछले कई सालों से चले हैं। महासंघ ने सरकार से नए रेट निर्धारित करने की भी मांग उठाई है। लोकमित्र संचालक महासंघ के राज्य मीडिया प्रभारी ने बताया कि लोक मित्र केंद्र संचालक के नाम पर कुछ लोग फर्जी रूप से पंचायतों में काम कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे संचालकों के खिलाफ उपायुक्त मंडी से कार्यवाही की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने फर्जी तरीके से इन संचालकों को आईडी वितरित की है उनके ऊपर भी कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके कुछ साथी आंवटित पंचायतों को छोड़कर किसी अन्य पंचायतों में कार्य कर रहे हैं, उनके उनके खिलाफ भी जिला प्रशासन को एक्शन लेना चाहिए। यदि उसके बाद भी यह संचालक बाज नहीं आते हैं तो इनकी आईडी को बंद किया जाए।

