इटरनल यूनिवर्सिटी बडू साहिब में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत

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राजगढ़ (राजकुमार सूद/संपादक),

शिक्षा जो मन को मुक्त करे वही वास्तविक है अकाल कॉलेज ऑफ एजुकेशन, इटरनल यूनिवर्सिटी और अकाल अकादमी बडू साहिब द्वारा आयोजित ‘भारतीय शिक्षा प्रणाली’ पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर मुख्य अतिथि डॉ. सुषमा यादव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शासी परिषद सदस्य एवं प्रो वाइस चांसलर, सेंट्रल हरियाणा विश्वविद्यालय (सीयूएच) ने कहा कि सही प्रकार की शिक्षा वह है जो मन को मुक्त करे। आज के सम्मेलन में प्रख्यात वक्ताओं और शिक्षाविदों ने अपने-अपने विषयों पर अपने विचार रखे। सम्मानित अतिथि प्रोफेसर सुधांशु भूषण, कुलपति, एनईआईपीए, नई दिल्ली ने कहा कि भारत के विश्वविद्यालयों में ऐसा पाठ्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता है जो समाज और उसकी समस्याओं से जुड़ा हो। उन्होंने समाज की समस्याओं से संबंधित डेटा एकत्र करने और उसकी समस्याओं को हल करने के लिए समाज से ज्ञान प्राप्त करने की सलाह दी। सम्मानित वक्ताओं में शामिल बिट्स पिलानी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. सौविक भट्टाचार्य ने सुझाव दिया कि भारत में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए अच्छे संस्थानों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण जैसी नियामक बाधाओं को कम किया जाना चाहिए। शिक्षण संस्थानों को फलने-फूलने के लिए छूट देने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अतीत में नौकरियां बल के बारे में थीं, आज नौकरियां मस्तिष्क के बारे में हैं, और भविष्य में नौकरियां जुनून के बारे में होंगी। सम्मेलन में अन्य वक्ताओं में डॉ अशोक पांडे, फॉर्मर डायरेक्टर ऑफ़ अहेलकॉन ग्रुप ऑफ़ स्कूल्ज /मेंबर ऑफ़ सीबीएसई- एनसीइारटी, डॉ अशोक पांडे , फॉर्मर डायरेक्टर ऑफ़ अहलकोन ग्रुप ऑफ़ स्कूल्ज /मेंबर ऑफ़ सीबीएसई –ऍनसीआरटी, डॉ धूराव रैना , प्रोफेसर , ज़ाकिर हुसैन सेंटर फॉर एजुकेशनल स्टडीज , जेएनयु , नई दिल्ली, डॉ दीपा कौत्स , डीन , फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन डिपार्टमेंट, जीएनडीयू, अमृतसर, मिस्टर जोसफ निक्सॉन, फॉर्मर सीईओ, एसबीआई टोक्यो ब्रांच, फॉर्मर प्रेजिडेंट , एसबीआई फाउंडेशन, डॉ विनोद आरया , असिस्टेंट प्रोफ , डिपार्टमेंट ऑफ़ सोशियोलॉजी , सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ पंजाब , जगदीश सिंह, डिप्टी सेक्रेटरी एनसीएम्ईआई, नई दिल्ली , गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया, डॉ आरती श्रीवास्तवा , प्रोफेसर एनआईइपीए, नई दिल्ली , डॉ देबजीत पालित, प्रोफ एनटीपीसी बिज़नेस स्कूल , नॉएडा , डॉ विवेक महरा ,फाउंडर , विक्रमशिला रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली, डॉ सारिका शर्मा, प्रोफेसर (डीन), स्कूल ऑफ़ एजुकेशन , सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हरयाणा, डॉ मनजू पंवार, हेड , डिपार्टमेंट ऑफ़ सोशल वर्क, डायरेक्टर- वीमेन स्टडी सेंटर पीएस विमेंस यूनिवर्सिटी , सोनीपत, श्री द्युतिमोय बिस्वास, सी ओ ओ- सनम एस 4 एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली, डॉ सज्जाद अहमद , असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन, जामिआ मिलिया इस्लामिआ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, डॉ अरबिंद केआर झा , डीन -स्कूल ऑफ़ एजुकेशन, इंदिरा गाँधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU), नई दिल्ली, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन उत्तर भारत के 16 विश्वविद्यालयों के 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।शिक्षा जो मन को मुक्त करे वही वास्तविक है
अकाल कॉलेज ऑफ एजुकेशन, इटरनल यूनिवर्सिटी और अकाल अकादमी बडू साहिब द्वारा आयोजित ‘भारतीय शिक्षा प्रणाली’ पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर मुख्य अतिथि डॉ. सुषमा यादव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शासी परिषद सदस्य एवं प्रो वाइस चांसलर, सेंट्रल हरियाणा विश्वविद्यालय (सीयूएच) ने कहा कि सही प्रकार की शिक्षा वह है जो मन को मुक्त करे। आज के सम्मेलन में प्रख्यात वक्ताओं और शिक्षाविदों ने अपने-अपने विषयों पर अपने विचार रखे।
सम्मानित अतिथि प्रोफेसर सुधांशु भूषण, कुलपति, एनईआईपीए, नई दिल्ली ने कहा कि भारत के विश्वविद्यालयों में ऐसा पाठ्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता है जो समाज और उसकी समस्याओं से जुड़ा हो। उन्होंने समाज की समस्याओं से संबंधित डेटा एकत्र करने और उसकी समस्याओं को हल करने के लिए समाज से ज्ञान प्राप्त करने की सलाह दी।
सम्मानित वक्ताओं में शामिल बिट्स पिलानी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. सौविक भट्टाचार्य ने सुझाव दिया कि भारत में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए अच्छे संस्थानों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण जैसी नियामक बाधाओं को कम किया जाना चाहिए। शिक्षण संस्थानों को फलने-फूलने के लिए छूट देने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अतीत में नौकरियां बल के बारे में थीं, आज नौकरियां मस्तिष्क के बारे में हैं, और भविष्य में नौकरियां जुनून के बारे में होंगी।
सम्मेलन में अन्य वक्ताओं में डॉ अशोक पांडे, फॉर्मर डायरेक्टर ऑफ़ अहेलकॉन ग्रुप ऑफ़ स्कूल्ज /मेंबर ऑफ़ सीबीएसई- एनसीइारटी, डॉ अशोक पांडे , फॉर्मर डायरेक्टर ऑफ़ अहलकोन ग्रुप ऑफ़ स्कूल्ज /मेंबर ऑफ़ सीबीएसई –ऍनसीआरटी, डॉ धूराव रैना , प्रोफेसर , ज़ाकिर हुसैन सेंटर फॉर एजुकेशनल स्टडीज , जेएनयु , नई दिल्ली, डॉ दीपा कौत्स , डीन , फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन डिपार्टमेंट, जीएनडीयू, अमृतसर, मिस्टर जोसफ निक्सॉन, फॉर्मर सीईओ, एसबीआई टोक्यो ब्रांच, फॉर्मर प्रेजिडेंट , एसबीआई फाउंडेशन, डॉ विनोद आरया , असिस्टेंट प्रोफ , डिपार्टमेंट ऑफ़ सोशियोलॉजी , सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ पंजाब , जगदीश सिंह, डिप्टी सेक्रेटरी एनसीएम्ईआई, नई दिल्ली , गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया, डॉ आरती श्रीवास्तवा , प्रोफेसर एनआईइपीए, नई दिल्ली , डॉ देबजीत पालित, प्रोफ एनटीपीसी बिज़नेस स्कूल , नॉएडा , डॉ विवेक महरा ,फाउंडर , विक्रमशिला रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली, डॉ सारिका शर्मा, प्रोफेसर (डीन), स्कूल ऑफ़ एजुकेशन , सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हरयाणा, डॉ मनजू पंवार, हेड , डिपार्टमेंट ऑफ़ सोशल वर्क, डायरेक्टर- वीमेन स्टडी सेंटर पीएस विमेंस यूनिवर्सिटी , सोनीपत, श्री द्युतिमोय बिस्वास, सी ओ ओ- सनम एस 4 एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली, डॉ सज्जाद अहमद , असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन, जामिआ मिलिया इस्लामिआ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, डॉ अरबिंद केआर झा , डीन -स्कूल ऑफ़ एजुकेशन, इंदिरा गाँधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU), नई दिल्ली, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन उत्तर भारत के 16 विश्वविद्यालयों के 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।

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