बिलासपुर : ऐतिहासिक मंदिरों की पुनर्स्थापन के लिए मिट्टी के सैंपल लेने का काम शुरू

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बिलासपुर (ब्यूरो रिपोर्ट),

बिलासपुर के सांढू मैदान स्थित ऐतिहासिक मंदिरों की पुनर्स्थापन और पर्यटन योजना के लिए गोबिंद सागर झील से भी मिट्टी के सैंपल लेने का काम शुरू हो गया है। इस काम को कर रही कंपनी के कर्मचारी मोटर बोट पर बोरिंग मशीन लगाकर झील के अंदर से मिट्टी के सैंपल ले रहे हैं। कंपनी अधिकारियों के अनुसार झील के अंदर से लुहणू मैदान से मंडी भराड़ी पुल तक 10 जगहों से मिट्टी के सैंपल लिए जाएंगे। इन मिट्टी के सैंपल को दिल्ली में आईजीसी कंपनी की लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। मिट्टी के सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान कितनी गहराई तक खोदाई करनी होगी। सरकार की ओर से अधिकृत सॉयल टेस्टिंग कंपनी के कर्मचारियों ने ऐतिहासिक सांढू मैदान में इन दिनों डेरा डाला हुआ है। उन्होंने पहले ड्रीलिंग मशीन से सांढू मैदान से आठ जगह सैंपल लिए और अब गोबिंद सागर झील के अंदर से भी मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं। बता दें कि योजना में पर्यटन स्थल को विकसित करने के लिए सांढू मैदान में कृत्रिम टापू बनाए जाना प्रस्तावित है। इन टापुओं को केवल पुल के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इन्हीं टापुओं पर जलमग्न हो चुके मंदिरों को लिफ्ट कर लाया जाएगा। इस योजना पर 1500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट को तीन चरणों में कार्यान्वित करने का प्रस्ताव है। पहले चरण में नाले के नौण के पास के जलमग्न तीन मुख्य मंदिरों को पुनर्स्थापन करने का प्रस्ताव है। दूसरे चरण में सांढू के मैदान को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आस-पास एक जलाशय बनाया जाएगा। इसमें रिवर फ्रं ट और वॉकवेज इत्यादि विकसित किए जाएंगे। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद बिलासपुर पर्यटन की दृष्टि से तेजी से विकसित होगा और पूरे जिले का केंद्र बिंदू सांढू मैदान होगा। लार्सन एंड टबरो कंपनी के जियोलॉजिस्ट राहुल भागवत ने बताया कि झील के अंदर से मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं। सैंपल दिल्ली स्थित लैब में जांच के लिए भेजे जाएंगे। जांच में यह पता लगाया जाना है कि नए आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए ठोस जगह कहां और कितनी गहराई में है।

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