
होली आ गई है | होली का ये प्राचीन त्योहार भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है | पौराणिक कथाओं के अनुसार जहां एक ओर यह त्योहार राधा कृष्ण के शाश्वत प्रेम का जश्न मनाता है , साथ ही इस दिन भक्त प्रह्लाद की दृढ़ भक्ति और उसकी बुआ होलिका के जलकर नष्ट हो जाने की भी याद दिलाता है | यह रंगों का त्योहार आज अमेरिका , कनाडा , दुबई और जर्मनी जैसे बड़े-बड़े देशों में भी बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है | लेकिन मुख्य रूप से ये भारतीय और नेपाली लोगों का त्योहार है | होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है |
वैसे तो ये पर्व त्योहार हमें समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास दिलाते है | लेकिन कुछ शरारती तत्व इस होली के त्योहार की पवित्रता को भंग करते है | आजकल कुछ लड़के-लड़कियां होली के दिन शराब और भांग का सेवन करते है और नशे की धुन में लोगों को परेशान करते है | कुछ लोग ऐसे भी होते है जो होली के बहाने “बुरा न मानो होली है” यह कह कर महिलाओं और लड़कियों को गलत तरीकों से छूने की कोशिश करते है |“बुरा न मानो होली है” यह सिर्फ एक फिल्मी डायलॉग है | लेकिन असल जिंदगी में ऐसी हरकतों का बुरा माना जाना चाहिए | इसी डायलॉग की वजह से हर साल पता नहीं कितनी लड़कियों को छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है | हमें ये समझना होगा कि किसी को भी उसके मर्जी के खिलाफ रंग लगाना या रंग लगाने के बहाने से छूना गलत है । और जिन लड़कियों के साथ भी ऐसा होता है उन्हे चुप न रह कर इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए ताकि कल को किसी और के साथ ऐसा न हो ।
हमारी कोशिश यह होनी चाहिए की हम इन पवित्र त्योहारो को अपनी मर्यादा में रह कर मनाए । ये इसलिए भी जरूरी है कताकि समाज के हर वर्ग के लोग इस त्योहार का आनंद ले सकें । और खासकर हमारी बेटियाँ होली के दिन घर में छिप कर न बैठ जाए । क्यूंकी सभी को समान रूप से त्योहार मनाने का अधिकार है । इसलिए होली को बदनाम करना अब बंद होना चाहिए ।
पल्लवी कश्यप (राजगढ़)