भावानगर (सुरजीत नेगी/संवाददाता),
नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय भारतीय सेंटर में सम्पूर्ण हिमालय क्षेत्रों के महान विद्वान गुरु परम श्रद्धेय क्याबजे लोछेन टुल्कु रिनपोछे केअध्यक्षता में भारतीय हिमालय नालंदा बौद्ध परम्परा परिषद की बैठक बौद्ध भिक्षुओं और भिक्षुणीयों द्वारा मंगलाचरण प्रार्थना के साथ शुरुआत हुआ था। बैठक के अध्यक्षीय भाषण में क्याब्जे लोछेन टुल्कु रिनपोछे ने कहा कि “हम सभी यहां अपनी मूल स्थानीय भाषा और पहचान को सुरक्षित रखने के महत्वपूर्ण कार्य के लिए एकत्रित हुए हैं। भारतीय हिमालय नालंदा बौद्ध परिषद भारतीय ट्रांस हिमालय क्षेत्र में नालंदा बौद्ध धर्म के सरंक्षण, प्रचार और विकास के लिए विशेष कार्य कर रहा है। रिनपोछे ने कहा कि नालंदा बुद्धिस्ट ट्रेडीशन केवल विश्वास के ऊपर नहीं टिका है। बल्कि लॉजिक के ऊपर टिका हुआ। हम लोग 21वीं शताब्दी में जी रहे हैं। 21वीं शताब्दी में साइंस ने बहुत तरक्की की है। तो इस दौर में लॉजिक का होना किसी भी चीज में बहुत जरूरी है और हमारी हर चीज, हर बात में विश्वास भी है और लॉजिक भी है। बुद्ध ने करुणा और मित्रिया के विषय पर ज्यादा जोर दिया है। यदि आपके अंदर करुणा और मित्रिया की भावना है। तभी आप शांति से रह पाएंगे, और उन्होंने कहा इसका उदाहरण आप घर में ही ले लो अगर आपके घर में करुणा की भावना है, मित्रिया की भावना है तभी आप घर में भी शांति से रह पाएंगे। तो करुणा और मित्रिया की भावना से घर में भी और देश में भी हर जगह शांति बनी रह सकती है। हम हर जगह शांति से रह सकते हैं। यही हमारा संदेश है और जितने भी लोग हमारे क्षेत्र में हैं उनकी सुरक्षा भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत के उत्तर में जो क्षेत्र है, वहा हमारी चीन के साथ सीमा पड़ती है। वहा पूरब से लेकर पश्चिम तक बौद्ध धर्म का प्रचार बहुत बड़े पैमाने पर हुआ है, और बौद्ध धर्म अभी तक जीवित है, तो इन इलाकों में हमारी जो संस्कृति है, हमारी जो आस्था है, हमें लगता है कि उसका थोड़ा बहुत पतन हुआ है। तो इस संबंध में हम यह विचार कर रहे हैं कि हमारी जो संस्कृति, हमारी जो आस्था है। उसको हम किस तरह से आगे बचा के रखेंगे और आगे बढ़कर एक सामूहिक तरीके से विचार करके आगे बढ़ेंगे। 2018 में हमें दिल्ली में परम पावन 14वें दलाई लामा के दर्शन हुए। उस वक़्त परम पावन दलाई लामा को भारतीय हिमालय नालंदा परिषद के मिशन के उद्देश्य के बारे विस्तार से सूचित किया गया तो परम पावन हमारे संगठन के उद्देश्यों को सुनकर प्रसन्न्ता पूर्वक हमें मार्ग दर्शन और आशीर्वाद दिया था। तब से लेकर मेरे सहयोगी संगठन के महासचिव मलिंग और पूरी टीम भारतीय हिमालय नालंदा बौद्ध परिषद के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत मेहनत कर रहे है। हमें और धैर्य से काम करने की जरूरत है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम इसमें सफल जरूर होंगे। हमारे मेहनत का फल हमारे आने वाले युवा पीढियों को अवश्य मिलेगी।” बैठक में पहली बार, परम पावन 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकार और अगले (15वें) दलाई लामा की नियुक्ति की बात आने पर बिना किसी हस्तक्षेप के आह्वान करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। नालंदा बौद्ध परंपरा की भारतीय हिमालयी परिषद (IHCNBT) ने एक प्रस्ताव में कहा, अगर चीन की पीपुल्स रिपब्लिक की सरकार राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दलाई लामा के लिए एक उम्मीदवार चुनती है, तो हिमालय के लोग इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। परम पावन दलाई लामा के पुनर्जन्म पर एकमात्र अधिकार गदेन फोडांग संस्था है। चीन सहित किसी को भी – ऐसी पवित्र और भक्ति प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अगले दलाई लामा को नियुक्त करने की बीजिंग की उत्सुकता के बारे में पत्रकारों के पूछे जाने पर, संगठन के अध्यक्ष महान गुरु क्याबजे लोछेन टुल्कु रिनपोछे ने कहा। “परम पावन दलाई लामा जी सभी बौद्धों के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं, न केवल हिमालयी क्षेत्र बल्कि अन्य देशों में .. चीनी सरकार कुछ कोशिश करती है लेकिन संस्था को प्रभावित नहीं कर सकेगी। संगठन के उपाध्यक्ष परम श्रद्धेय क्याबजे जंगछुप छोदेन रिनपोछे जी ने प्रकाश डाला कि, “चीन एजेंडे को संभालने के लिए बहुत सी चीजों की तैयारी कर रहा है। हमारे लिए, हिमालयी बौद्ध, परम पावन, उनकी संस्था, और इस संस्था को जारी रखना बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है। परम पावन हिमालयी क्षेत्र से बहुत मजबूती से जुड़े हुए हैं”। परिषद के महासचिव मलिंग गोंबो जी ने आगे कहा, “दलाई लामा के पुनर्जन्म का मुद्दा विशुद्ध रूप से एक धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दा है, इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए किसी अन्य प्राधिकरण की कोई भूमिका नहीं है”। IHCNBT का गठन 2018 में किया गया था और इसमें भारतीय केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों का शीर्ष बौद्ध नेतृत्व है। प्राचीन भारतीय नालंदा परंपरा के महान विद्वान गुरु परम श्रद्धेय क्याबजे गदेन ठिसूर रीगजोंग से रीनपोछे जी के महापरिनिर्वाण पर श्रद्धा पूर्वक श्रद्धांजली के रूप में कुछ समय मौन धारण करने के पश्चात जनकल्याण हेतु विश्व के सर्वोत्तम बौद्ध धर्म गुरु परम पावन दलाई लामा जी के दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ तथा बुद्ध शासन पूर्णिमा के चांद की तरह फलने-फूलने और विश्व में शांति बने रहने के लिए प्रार्थना के साथ बैठक समापन हुआ। रात साढ़े सात बजे टेरेस परगोला इंटरनेशनल इंडियन सेंटर में रात्रिभोज पर माननीय कानून और न्याय मंत्रालय, किरेन रिजुजू, माननीय संसद सदस्य (लोकसभा) जामयांग सेरिंग नामग्याल, माननीय सदस्य, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, मैडोम रिनचेन ल्हामो आमन्त्रित किया गया था। सचमुच ही भारतीय हिमालयी नालंदा बौद्ध परिषद परम श्रद्धेय क्याबजे लोछेन टुल्कु रिनपोछे के अध्यक्षता में बहुत अच्छे कार्य कर रहे हैं। हम भारतीय हिमालयी नालंदा बौद्ध परिषद की सभी धर्मिक गतिविधियों और उद्देश्यों की सफलता की प्रार्थना करते हैं।

